मानसिक स्वच्छता दिवस के रूप में संवत्सरी पर्व की भूमिका

इस दिन सभी परस्पर एक-दूसरे से अपने ज्ञात और अज्ञात भूलों अथवा अपराधों के लिए क्षमा याचना करते हैं, न केवल परस्पर ही, अपितु मानवमात्र और प्राणिमात्र से भी क्षमा की प्रार्थना करते हैं। इसप्रकार प्रत्येक प्राणिमात्र के प्रति क्षमायाचना करते हुए अपने मन की शुद्धि का पर्व मनाया जाता है। अक्सर हम अपने मित्रों से क्षमा मांगते हैं, जबकि क्षमा तो हमें अपने शत्रुओं से मांगनी चाहिए।